मोम्मद इस्लाम इब्ने शेख बहादुर अली , सकीं मोहल्ला बाज़ार भुआ, थे.यह कुश्ती मैं महर थे और अक्सर इनामात वाघिरह भी पते थे. एस सम ओ सलत के पाबन्द थे और मज़हबी मुआमलात मैं सख्त थे.
शेख मोहम्मद इस्लाम एक बेहतरीन जाकिर ऐ सय्यिद ऐ शोहदा थे और इमामबाडा चम्मन के जाकिर थे.
मोअज्ज़ा: एक साल शेख मोहम्मद इस्लाम, शब् ऐ आशूर अपने घेर के सामने चौक पे ताजिया रेख के इमामबारा चम्मन मैं ज़किरी के लिये गए.वहाँ से सब्जी बाज़ार मदद अली के अज़खाने गए और बाद नजरो नियाज़ जब अपने घेर वापस आ रहे थे तोह काजी मोहम्मद जमिउल्लाह के पेसर ऐ मुल्ला खालिलुल्लाह काजी जौनपुर नए उनको दंगे फसाद के देर से गिरफ्तार केर लिया. यह वाकेया बाज़ार अलिफ़ खान उर्फ़ काजी की गली मैं हुआ. बहुत सिफारिश की गयी लेकिन कोई असर न हुआ.
शेख मोहम्मद इस्लामिल के भाई अली और उनकी जओज़ा नए चाह की अपने चौक का ताजिया दफ़न केर दिया जाए लेकिन शेख मोहम्मद इस्लामिल नए इजाज़त न दी और ताजिया जीनत ऐ चौक बना रह.
उनकी जोज़ा दिन रात एम ऐ मासूम और शहीदन ऐ कर्बला के वास्ते से दुआ किया करती रहीं और शेख मोहम्मद इस्लाम क़ैद खाने के अंदरूनी हिस्से मैं आपकी बेगुनाही की फरियाद अल्लाह से करते और रुते रहते थे.
१९ सफ़र को शेख मोहम्मद इस्लाम पे जब की वोह दुआ मैं मसरूफ थे अचानक घुनूदगी तरी हो गए. किसी नए कहां जाओ तुम आज़ाद हो. उनकी यही बशारत उनकी जौजा नए भी सुनी और शेइख इस्लाम के भाई को बताया.
शेख मोहम्मद इस्लामिल जब हूश मैं आये तोह देखा उनकी बेडियाँ खुली हैं और क़ैद खाने का दरवाज़ा भी खुला है. जब वोह बाहेर निकल रहे थे तोह पहरे डरूं नए उनको रूका ओअर काजी को खबर दी. काजी नए उनको नहीं रूका और आज़ाद केर दिया.
शेख मोहम्मद इस्लाम बस वहीं से लोगून को इत्तेला देते हुए घेर आये. जब मोमिनीन जमा हो गए , मजलिस की और वोह ताजिया जो शब् ऐ अशोर चौक पे रेखा गया था, वोह १९ सफ़र को उठा. (अल्लाह हम्मा सल्ले अल मुहम्मद व आल ऐ मुहम्मद.
चौक मुहम्मद इस्लाम से सदर इमामबारा बहुत करीब है. लेकिन इस ख्याल से के औरतें भी, अपने घरून्से जिअरत केर सकें. काजी जमील उल्लाह साहब, काजी जौनपुर नए भाई ख्वाहिश ज़ाहिर की के, यह जुलूस उनके दरवाज़े से घुज्राए, इसलिये ताजिया उठा तोह चौक मुहम्मद इस्लाम , बाज़ार भुआ से महल्लाह चत्तर मुहल्लाह कोठिया, मोहल्ला टोला, मुहल्लाह बार दुअरिया, मुहल्लाह हमाम दरवाज़ा, मोहल्ला शेख महामिद, मोहल्ला अजमेरी,मोहल्ला बाज़ार अलिफ़ खान, काजी की गली,मुहल्लाह मोहल्ला उमर खान, ज़ेर ऐ मस्जिद कलां, मोहल्ला अर्ज़क,मोहल्ला नकी फाटक, मुहल्लाह बाघ ऐ हाशिम,,मोहल्ला दलियाना टोला, मुहल्लाह शेख बुहनुद्दीन पुरा, मुहल्लाह मकदूम शाह बडे, मुहल्लाह बाज़ार टोला, रानी बाज़ार,मुहल्लाह नासिर ख्वान,छत्री घाट, मुहल्लाह नवाब गाजी का कुवां,मुहल्लाह जगदीशपुर,बेगम गंज , होता हुआ सदर इमाम्बदाए तक आया और दफ़न केर दिया गया.
इस जुलूस का यह रास्ता मुस्तकिल हो गया जो की अब तक है. १९ सफ़र का यह ताजिया शेख मुहम्मद इस्लाम हेर साल उसी तारिख को उठाने लोअगाए. उनकी इस रही का वाकेया अजीब मुआजाना तौर पे वाकू मैं अयाय था. बाज़ रावेतून से यह भी ज़ाहिर है की, असीरण ऐ कर्बला रह हो के, १९ सफ़र को कर्बला मैं पहुंचे थे.
शहर के और भी अज़खानूं के ताजिया भी, इसी तारिख मैं उठने लगे.और सब के सब एक के एक,इस्लाम के ताजिए के साथ रास्ते मैं, शामिल होते जताए हैं. आगे इस्लाम का ताजिया होता है, और उसके बाद दूसरे अज़खानूं के ताजिए रहते हैं. यह जुलूस शाम को सदर इमं बार पहुच के तमाम होता है. साथ मैं मुआताद्दिद, टेबल बजा करते हैं.मोनिनीस गिरूह देर गिरूह मातम मैं मसरूफ और दुश्मिनान ऐ आल ऐ रसूल(स.अ.व) के इजहारे बारात करते हुए चलते हैं. मजमा कसीर होता है.
आज के दौर मैं १८ और १९ सफ़र को इसी इस्लाम के चौक पे सैयेदा का लाल का चेहल्लुम हुआ करते है और कई लाख मोमिनून का मजमा होता है.
अब यह ताजिया शब् ऐ आशूर को न रेख के १८ सफ़र (शब् ऐ १९) रात ८ बजे रेखा जाता है और रात बहर मकामी अंजुमन ऐ मातम, गिरया, सीना जानी करती हैं. यह ताजिया मन्नत मुराद पूरी होने के माम लात मैं भी बहुत मशहूर है. और यहाँ मांगी दुआ रद्द नहीं होती.
१९ सफ़र वक्त जुहार यह ताजिया बाद सूज ख्वानी और मजलिस, उठाया जाता है और आज भी यह उसी ऊपर बताए पुराने रास्ते से होता हुआ सदर इमामबारा जाता है. इस ताजिया के साथ एक तुर्बत भी उठा करती है , जिसे भी एक मोजज़ा मंसूब है.
इस चेहल्लुम के जुलूस और मोजज़े से यह भी ज़ाहिर होता है, अगेर कोई नेक नियत, अकीदत के साथ, शोहदा ऐ कर्बला की अजादारी करे तोह अल्लाह उसे हेर क़ैद से आज़ाद करेगा, और येही मुज्ज़ा शैख़ मोहमम्द इस्लामिल मरूम के साथ हुआ. जिस तरह अल्लाह नए शैख़ इस्लाम को क़ैद से रही दिलवाए , उसी तरह अल्लाह हेर अजादार ऐ हुसैन (अ.स) की मुराद पूरी करे. अमीन
वास्सलम
स्येद मोहम्मद मासूम
ज़ुल्कादर मंजिल जौनपुर.