मुसलमानों की देशभक्ति पे शक क्यूं ?
आज गन्दी राजनीती का बोलबाला है. एक इंसान को दूसरे इंसान का दुश्मन धर्म के नाम पे बनाया जा रहा है. अगर किसी मुसलमान ने वन्दे मातरम शब्द को न कहने की बात कही तो वोह देशद्रोही हो गया. एक तरफ़ जहां हिन्दुस्तान में मज़हब के नाम पर नफ़रत फैलाने का काम किया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ कुछ जाहिल गंगा जमुना संस्कृति के नारे लगा केर वाह वाही लूट रहे हैं. इंसानियत के मायने यही हैं की सभी धर्म के लोगों से प्रेम करो, उनको जानो और अपने धर्म पे चलो. हिन्दू मुस्लिम को दोस्त बनाने के लिये हिन्दू को नमाज़ पढ़ना और मुसलमान को मंदिर में बिठाने के ज़रुरत नहीं. इंसानियत का नाता धर्म से बड़ा है.
इस्लाम तालीम पर और इस बात पर ज़ोर देता है कि हम अपना मज़हब भी समझ कर ही अपनाएं हम मुस्लमान इसलिए नहीं हैं की हम मुसलमान परिवार में जन्मे हैं सभी धर्म को जानो और समझो , गीता भी पढो रामायण , वेड पुराण भी देखो और जब कोई एक धर्म सही लग जाए तोह उस की राह पे चलो और दूसरों को जो धर्म पसंद है उनको उसपे चलने दो. मुस्लिम के खलीफा हजरत अली (अ.स) का कहना है, जो मुसलमान है वोह दुसरे मुसलमान का धर्म भाई है और बाकी सब इन्सान इंसानियत के रिश्ते से भाई हैं. क्या यह भाईचारे का पैग़ाम नहीं?
मुसलमान एक खुदा को मानता है. और सिर्फ उसी के आगे सर झुकाता है. अब अगर कोई मुसलमान किसी और के आगे सर झुकाने से मना करे तोह क्या वोह देश द्रोही हो गया? इस वन्दे मातरम गाने में न किसी फतवे की ज़रुरत है न मशविरे की अगर इस वन्दे का मतलब है देश को सलाम ( जैसे मां तुझे सलाम) है तोह यकीन जानिए हर मुसलमान इसको गाएगा. और अगेर भारत देश को एक देवी मां के इसके आगे सर झुकाना इस वन्दे का मतलब है तोह यह मुसलमान के साथ ज्यादती है की उस से यह करने को कह जाए. अगर आप वंदे मातरम्, वंदे मातरम्! का श्री अरबिन्द द्वारा किए गए अंग्रेजी अनुवाद का हिन्दी अनुवाद देखें तोह आप को मिलेगा मैं आपके सामने नतमस्तक होता हूं। ओ माता,और इस नतमस्तक को सलाम के मायेने में भी लिया जा सकता है.
क्या सिर्फ वन्दे मातरम् कह देने से कोई भी भारतीय देश भक्त हो जाएगा? और यह भी गलत है की कोई मुल्ला इसको एक बड़ा मसला बना लें और फतवे देने लगें. यह सब हकीकत में गन्दी राजनीति की देन है वरना यह कोई मसला नहीं है.
मुसलमान इस्लाम पे चलता है और इस्लाम में देशभक्ति पे बहुत ज़ोर दिया गया है. देशभक्ति और देशप्रेम मुसलमान की पहचान है.
कुछ लोग ऐसे माहौल में नाम कमाने के लिये न मुसलमान को मुसलमान रहने देना चाहते हैं और न हिन्दू को हिन्दू. और सबसे बड़ा कमाल यह है की यह लोग मदरसे में कुरान के साथ साथ गीता और रामायण की पढाई पे तोह खुश होते हैं लेकिन ईसाईयों की सिखों की किताब पढ़ने की बात भूल जाते हैं. यह इस बात का सुबूत है यह सर्वधर्मसम्भाव का मामला नहीं गन्दी राजनीती से प्ररित है.
यह गंगा जमुना संस्कृति के हिमायती असल में न मुसलमान को मुसलमान रहने देना चाहते हैं और न हिन्दू को हिन्दू. अरे भाई गंगा को गंगा रहने दो जमुना को जमुना , पानी दोनों का मीठा है और इंसानों की जान बचाता है. गन्दी राजनीति धर्म के नाम पे बंद करो गंगा जमुना का संगम खुद ही हो जाएगा.
नौगांवा सदात के मौलाना नईम अब्बास साहेब के एक मदरसे का यह विडियो है और आप देख सकते हैं, भारत के सभी स्कूल की तरह यहाँ भी राष्ट्रीय गान से दिन शुरू होता है. और यह आम बात है जिसे आप अगेर देखना चाहें तोह बहुत से मदरसों में ऐसा मिलेगा.
Related posts:
If you enjoyed this article, subscribe to receive more great content just like it.
लोकप्रिय पोस्ट
-
Quran Hindi 78to114
-
हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के पिता हज़रत इमाम अली अलैहिस्सलाम व आपकी माता हज़रत फ़तिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा हैं। आप अपने माता पिता की द...
-
इंदौर की अर्चना जी का शुक्रिया जिन्होंने इस पोस्ट को बेहतरीन अंदाज़ मैं पढ़ा.. आप सब भी सुने. इमाम हुसैन की शहादत को नमन करते हुए हमारी ओ...
-
मैंने अंग्रेजी ब्लॉगजगत का १५ साल का सफ़र तय करते हुए ,६ महीने पहले हिंदी ब्लॉगजगत मैं अपना क़दम रखा और सच मानिये मुझे हिंदी ब्लॉगजगत ने ब...
-
जब भी कोई दुर्घटना हो जाए, और आप अखबार पलटने लहें तो नेताओं का वही बडबोलापन, वही गलीज छींटाकशी. एक दूसरे पर पढने को मिलेगी. बडबोले नेता अप...
-
" खुशियाँ लुटा के जीने का इस ढंग है ज़िंदगी “समीर लाल ( उड़नतश्तरी) “ यह नाम इस ब्लॉगजगत मैं किसी के तार्रुफ़ का मुहताज नहीं है . इ...
-
पेश ए खिदमत है "अमन के पैग़ाम पे सितारों की तरह चमकें की चौथी पेशकश ... राजेन्द्र स्वर्णकार बीकानेर से कुछ इस तरह से "अमन का पै...
-
" अमन के पैग़ाम" पे सितारों की तरह चमकें की पहली पेशकश . रज़िया राज़ जी की जितनी तारीफ की जाए कम है. जब मैंने उन से निवेदन किया...
-
जैसा की हमेशा से होता है, कोई भी त्यौहार आये हम -४-५ दिन पहले से तैयारी शुरू कर देते हैं. ऐसी तैय्यारियाँ मैंने इस साल बकरा ईद पे ब्लोगेर्स ...
-
हर साल मुहर्रम का चाँद दिखाई देते ही ,हर तरफ कर्बला, या हुसैन की सदा सुनाई देने लगती है, लोगों की ज़बान पे पैगाम है इंसानियत,सब्र ए ...









