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इस्लाम छोडो, फतवों से आजादी लो"
मैंने कल खबरों में पढ़ा की अमेरिका में बसों पे ऐसे पोस्टर लगे हैं की इस्लाम छोडो, फतवों से आजादी लो और अगर कोई मुस्लिम लीडर धमकी दे तोह मदद के लिए भी एक इदारा आगे आया है.
इस्लाम की कामयाबी उसके बेहतरीन उसूल और कभी न टूटने वाला रिश्ता बहुत से मुल्कों को नागवार गुज़रता है. उनका काम सिर्फ मुसलमान को कमज़ोर बनाना है जिस से की वो दुनिया पे राज कर सकें. यह काम कई शक्लों में झूट सच की मिलावट के साथ बखूबी अंजाम दिया जा रह है.इसमें शामिल है:
इस्लाम के कानून को जबर और सख्त साबित करो.
- मुस्लिम को ज़ालिम करार दो.
- इस्लाम की मुबारक हस्तिओं के किरदार को दाग़ दार बनाओ.
- कुरान में ग़लतियाँ और कमियाँ निकालो.
- और मुसलामों में उनके आपसी इख्तेलाफात को उभार के उनमें झगडे करवाओ और उनको कमज़ोर करो.
ये सब के सब झूट और फ़रेब के साथ काम किया जा रेहा है. आज यह ज़रूरी हो गेया है कि हम अपने बच्चो को इस्लाम की ,हदीस कि सही तालीम दे जिस से कोइ उनको झूट, के ज़रिये गुमराह न कर सके.
इन्सान कि एक फितरत होती है कि वो किसी कानून में बंध के नहीं रहना चाह्ता और इसी इंसानी फ़ितरत या कमज़ोरी का फायदा येह "इस्लाम छोडो, फतवों से आजादी लो" का नारा लगाने वाले ले रहे हैं.
हर एक देश ,कौम , इदारे , मज़हब का एक कानून हुआ करता है और उस के खिलाफ़ जाने वाला सज़ा का हक्दार होता है. "समाज छोडो कपडॊ से आजादी" जैसी बातें सिर्फ़ गुमराह करने का काम करती हैं.
इस्लाम को अगर कोइ व्यक्ति छोड़ना चाह्ता है तो यह एक ऐसा गुनाह है जिसकी माफ़ी नहीं , लेकिन सज़ा, इन्सान नहीं दे सकता , सिर्फ अल्लाह को सजा का हक हासिल है.
इस्लाम के साथ यही तोह बुरा हुआ कि बहुत से मुनाफिकों ने दिखावे के लिए इस्लाम कुबूल कर लिया और मुस्लमान बन के इस्लाम को नुक्सान पहुंचाते रहे . मुनाफ़िक़ का इस्लाम से बाहर चला जाना ही मुनासिब है.
आज भी जो इस्लाम बदनाम हो रहा है, और जिसका फैदा यह दुश्मन ए इस्ल्लाम ले रहा है, इसकी वजह मुनाफिकों का कानून और फतवा है.
यह इस्लाम से आजादी का वादा करने वाले, नारा देने वाले , ताक़त परस्त , दुनिया परस्त लोग हैं , इनका कोई भी मज़हब नहीं.
स.म.मसुम
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