फतवे की हकीकत.
मुसलमान के दो लव्ज़ फतवा और जिहाद का सबसे ज्यादा ग़लत इस्तेमाल हुआ है. इसके ज्यादा ज़िम्मेदार हम मुस्लिम खुद ही हैं. हमने मौक़ा दिया दूसरे मज़हब को मान नए वलून को और उन्हूने इस्पे एतराज़ किया, मज़ाक बनाया.
पहले मैं फतवा लव्ज़ पे कुछ कहना चाहूँगा.
इस्लाम मैं मज़हब सीखने के लिये सबसे बेह्टर कुरान और हदीथ और दुनिअवी इलेम रखने वाले से इस्लाम सीखने की हिदायत दी गयी है.
इस्लाम नाम है कुरान के बताए कानून पे चलने का और कुरान के किसी भी कानून मैं तबदीली की ज़रुरत नहीं क्यूंकि यह हेर दौर के इंसानों को नज़र मैं रख के अल्लाह का बनाया कानून है. अल्लाह वोह है जो सब जानता है और हेर चीज़ का बना ने वाला और मालिक है.
यकीनन इस्लाम मैं जबर नहीं. किसी ऐसे इंसान पे जो इस्लाम पे न हो और वोह काम करे जो इस्लाम मैं मना है तोह , कोई मुफ्ती, या आलिम फतवा जारी नहीं केर सकता . जब कोई शख्स यह कहता है की वोह इस्लाम पे है और काम इस्लाम के खिलाफ करता है तोह मुफ्ती फतवा जारी केर सकता है. और इसमें किसी दूसरे मज़हब को मान नए वाले को एतराज़ भी नहीं करना चाइये क्यूकी यह मुस्लिम का जाती मसला है, उनका इस से कोई लेना देना नहीं.
और मुस्लिम को भी अपने आलिम के फतवे की इज्ज़त करनी चाहिये औए अगेर इस्लाम के कानून के खिलाफ ही चलना है तोह खुद को मुस्लिम कहना बंद केर दे , उसपे कोई फतवा जारी नहीं होगा.
ख्याल रहे फतवा सिर्फ सबसे बेह्टर इस्लाम का हुक्म रखने वाला आलम ही दे सकता है, यह हर गली के मुल्ला का काम नहीं , जबकि ऐसा हो रह है और कठमुल्ला ही इस्लाम को बदनाम केर रहे हैं.
फतवे की एक मिसाल: वन्दे मातरम का मसला आया , मुस्लिम्स नए इसके खिलाफ आवाज़ उठाई, ग़ैर मुस्लिम नए इसको देशद्रोही का काम बताया. कुछ मौल्विऊँ नए इसका फैदा लिया, फतवे पे फतवा भेज दिया. इन्सनूं मैं ताफ्रेका पहिला, वोट बैंक मज़बूत हुए, कुछ मौल्विऊँ की जेब गर्म हुई. यह सब कध्मुल्लाओं की वजह से हुआ.
इस्लाम सिर्फ और सिर्फ अल्लाह की इबादत करने का हुक्म देता है. और मा बाप से, वतन से मुहब्बत को फ़र्ज़ करार देता है. हेर मुस्लिम अगेर वोह हिन्दुस्तानी है तोह वोह अपने वतन से मुहब्बत ज़रूर करेगा. मुहब्बत सिर्फ वतन से ही नहीं उस वतन मैं रहने वालों से भी मुहब्बत करेगा.
अगेर वन्दे मातरम् का मने हैं इबादत करने की वतन की, तोह यह मुस्लिम्स पे जबर है और मुस्लिम ऐसा न करने पे मजबूर है. और अगेर इसका मतलब वतन से मुहब्बत करना है तोह हेर मुस्लिम को ख़ुशी होगी वन्दे मातरम गाने में.
क्या आप को इसमें किसी फतवे की ज़रुरत लगती है? क्या आप को इसमें कोई देशद्रोह नज़र आता है?
में समझता हूँ हेर एक का जवाब होगा नहीं में.
स.म.मासूम
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