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अमन की दिशा में एक और रचनात्मक क़दम

peace

मादरे वतन '

इस मादरे वतन के ज़ख्मों को मत कुरेदो ,

जो दे सको तो इस को मरहम ज़रूर दे दो .

बच्चे जो इस के बिछड़े, अब तक न मिल सके हैं ,

बेचैन है ये मादर तस्कीन इस को दे दो.

बेवजह लड़ रहे हैं इक दूसरे से भाई ,

ये दुश्मनी मिटाकर , फ़ह्म ओ शऊर दे दो .

जब बात आश्ती की, अम्नो अमां की आये ,

बस मुस्कुराहटें ही इक दूसरे को दे दो .

अब बुग्ज़ और कीना, दिल से निकाल फेंको,

ये चाल है सियासी, तुम इनको मात दे दो .

कुछ तुम भी भूल जाओ ,कुछ हम भी भूल जाएँ ,

बस इक यक़ीन ले लो और इक यक़ीन दे दो .


मादर=माँ  , फ़ह्म ओ शऊर =बुद्धि और विवेक  , आश्ती = शान्ति  , बुग्ज़ = ईर्ष्या
कीना = नफ़रत

Source:http://ismatzaidi.blogspot.com

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